गुलाबजामुन
गुलाबजामुन
डॉ0 साधना अडवानी
चमोली को गुलाबजामुन बहुत पसंद थे। दो दिन बाद होली का त्योहार था। उसे पता था 'माँ गुलाबजामुन ज़रूर बनाएगी।' यह सोचकर ही उसकी जीभ लपलपा उठीं थी।
अपने मन की बात उसने अपनी प्यारी कोको बिल्ली को कई बार बताई। बिल्ली को क्या समझा, यह नही पता पर उसने भी पूँछ हिलाकर अपनी खुशी व्यक्त की।
घर में मिठाई बनाने का सामा आया। माँ ने कहा, "चमोली तुम्हारे लिए गुलाबजामुन बनेंगे। क्या तुम मेरी मदद करोगी?" सुनकर चमोली के अंग-अंग में फुर्ती सी आ गयी।
उछ्लती कूदती हुई पहुँची माँ के पास रसोईघर में। "माँ! माँ! मैं आपकी मदद करूँगी तो मुझे ज़्यादा गुलाब जामुन मिलेंगे??"
हाँ!हाँ! क्यों नहीं मेरी रानी बिटिया तुम्हारे लिए ही तो बना रही हूँ।"
"माँ! मेरी कोको को भी देना"
"हाँ ज़रूर दूँगी तुम्हारी कोको को"
म्याऊँ म्याऊँ कहकर कोको ने माँ मो धन्यवाद कहा।
माँ के निर्देश पर चमोली ने साबुन से हाथ धोए। साफ़ नैपकिन से हाथ पोंछे ।फ़्रिज से खोवे का पैकेट निकाला।खोवे को कसनी में कसकर चूरा बना दिया।
माँ ने प्रशंसा भरी निगाहों से चमोली को देखा।
"माँ! शक्कर कितनी निकालूँ?"
"पाँच कटोरी डालो भगौने में और तीन कटोरी पानी"
चमोली ने बड़े करीने से शक्कर और पानी सही अनुपात में भगौने में डालकर माँ को दिया।
माँ ने गैस चूल्हें पर चाशनी बनाने के लिए बर्तन रख दिया।
कसे हुए खोवे में थोड़ा आटा और थोड़ी पिसी हुई शक्कर तथा चुटकी भर सोडा और इलायची पाउडर डालकर दूध से गूँथ कर आटा तैयार किया।
अब तक चाशनी तैयार हो गई थी। गैस चूल्हे पर माँ ने कड़ाही में तेल गर्म करने को रखा।
चमोली ने गुलाबजामुन के आटे से छोटी छोटी गोलियाँ बनाईं। चमोली की माँ ने उन्हीं गोलियों को एक एक करके तेल में डाला।
तेल में डालते ही वे फूलकर बड़ी होने लगी। सुनहरे भूरे रंग के गुलाबजामुन तैयार हो गए। उन्हें फिर चाशनी में डाल दिया।
चमोली सब कुछ देखना चाहती थी, इसलिये एक कुर्सी घसीटकर किचन में ले आई।
कुर्सी पर चढ़कर चाशनी में डले हुए गुलाबजामुन देखकर ताली बजाने लगी।
वह गुलाबजामुन की गिनती करने लगी,"एक....दो....तीन....नौ....दस। माँ! पन्द्रह गुलाबजामुन बन गए। माँ! गुलाबजामुन सारे मोटे हो गए गोल-मटोल।"
माँ चमोली के भोलेपन पर हँस पड़ी और कहा, "हाँ चमोली! गुलाबजामुन धीरे-धीरे चाशनी सोखते जाते है तो गोल मटोल हो जाते है।"
"अच्छा माँ इनको भी मीठी चाशनी बहुत पसन्द है क्या?"
"हाँ अब बताओ मीठी मीठी चाशनी अब इनके पेट मे चली गई तो अब ये तुम्हें कैसे मिलेगी?"
चमोली हँसते हँसते बोली, "माँ! जब ये गुलाबजामुन मेरे पेट मे जाएँगे तो मीठी मीठी चाशनी भी साथ जाएगी।"
तभी माँ ने दो प्यालियों में गुलाबजामुन डाले। एक प्याली चमोली के लिए और दूसरी कोको के लिए। कोको ने अपनी मूँछों को भी चाशनी में भिगा लिया था। जीभ से चाटकर मूँछो को साफ करने की कोशिश करने लगी।
वही चमोली ने बड़े मजे से धीरे धीरे गुलाबजामुन को स्वाद ले-लेकर खाया।
संचयिका कहानी संग्रह में प्रकाशित
डॉ0 साधना अडवानी
चमोली को गुलाबजामुन बहुत पसंद थे। दो दिन बाद होली का त्योहार था। उसे पता था 'माँ गुलाबजामुन ज़रूर बनाएगी।' यह सोचकर ही उसकी जीभ लपलपा उठीं थी।
अपने मन की बात उसने अपनी प्यारी कोको बिल्ली को कई बार बताई। बिल्ली को क्या समझा, यह नही पता पर उसने भी पूँछ हिलाकर अपनी खुशी व्यक्त की।
घर में मिठाई बनाने का सामा आया। माँ ने कहा, "चमोली तुम्हारे लिए गुलाबजामुन बनेंगे। क्या तुम मेरी मदद करोगी?" सुनकर चमोली के अंग-अंग में फुर्ती सी आ गयी।
उछ्लती कूदती हुई पहुँची माँ के पास रसोईघर में। "माँ! माँ! मैं आपकी मदद करूँगी तो मुझे ज़्यादा गुलाब जामुन मिलेंगे??"
हाँ!हाँ! क्यों नहीं मेरी रानी बिटिया तुम्हारे लिए ही तो बना रही हूँ।"
"माँ! मेरी कोको को भी देना"
"हाँ ज़रूर दूँगी तुम्हारी कोको को"
म्याऊँ म्याऊँ कहकर कोको ने माँ मो धन्यवाद कहा।
माँ के निर्देश पर चमोली ने साबुन से हाथ धोए। साफ़ नैपकिन से हाथ पोंछे ।फ़्रिज से खोवे का पैकेट निकाला।खोवे को कसनी में कसकर चूरा बना दिया।
माँ ने प्रशंसा भरी निगाहों से चमोली को देखा।
"माँ! शक्कर कितनी निकालूँ?"
"पाँच कटोरी डालो भगौने में और तीन कटोरी पानी"
चमोली ने बड़े करीने से शक्कर और पानी सही अनुपात में भगौने में डालकर माँ को दिया।
माँ ने गैस चूल्हें पर चाशनी बनाने के लिए बर्तन रख दिया।
कसे हुए खोवे में थोड़ा आटा और थोड़ी पिसी हुई शक्कर तथा चुटकी भर सोडा और इलायची पाउडर डालकर दूध से गूँथ कर आटा तैयार किया।
अब तक चाशनी तैयार हो गई थी। गैस चूल्हे पर माँ ने कड़ाही में तेल गर्म करने को रखा।
चमोली ने गुलाबजामुन के आटे से छोटी छोटी गोलियाँ बनाईं। चमोली की माँ ने उन्हीं गोलियों को एक एक करके तेल में डाला।
तेल में डालते ही वे फूलकर बड़ी होने लगी। सुनहरे भूरे रंग के गुलाबजामुन तैयार हो गए। उन्हें फिर चाशनी में डाल दिया।
चमोली सब कुछ देखना चाहती थी, इसलिये एक कुर्सी घसीटकर किचन में ले आई।
कुर्सी पर चढ़कर चाशनी में डले हुए गुलाबजामुन देखकर ताली बजाने लगी।
वह गुलाबजामुन की गिनती करने लगी,"एक....दो....तीन....नौ....दस। माँ! पन्द्रह गुलाबजामुन बन गए। माँ! गुलाबजामुन सारे मोटे हो गए गोल-मटोल।"
माँ चमोली के भोलेपन पर हँस पड़ी और कहा, "हाँ चमोली! गुलाबजामुन धीरे-धीरे चाशनी सोखते जाते है तो गोल मटोल हो जाते है।"
"अच्छा माँ इनको भी मीठी चाशनी बहुत पसन्द है क्या?"
"हाँ अब बताओ मीठी मीठी चाशनी अब इनके पेट मे चली गई तो अब ये तुम्हें कैसे मिलेगी?"
चमोली हँसते हँसते बोली, "माँ! जब ये गुलाबजामुन मेरे पेट मे जाएँगे तो मीठी मीठी चाशनी भी साथ जाएगी।"
तभी माँ ने दो प्यालियों में गुलाबजामुन डाले। एक प्याली चमोली के लिए और दूसरी कोको के लिए। कोको ने अपनी मूँछों को भी चाशनी में भिगा लिया था। जीभ से चाटकर मूँछो को साफ करने की कोशिश करने लगी।
वही चमोली ने बड़े मजे से धीरे धीरे गुलाबजामुन को स्वाद ले-लेकर खाया।
संचयिका कहानी संग्रह में प्रकाशित
I tried the recipe and it actually worked. It was fab!!🤤🤤
जवाब देंहटाएं😊😊😊
जवाब देंहटाएं😀😀
हटाएंIt's so good to teach children some good habits through stories like ...before doing anything in the kitchen chamoli washed her hand.. thank you for writing such stories...will look forward for more...☺️☺️
जवाब देंहटाएंThanks for reading 😊
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